
छोटेडोंगर में आयोजित प्रसिद्ध माता मावली मेला में इस वर्ष भी श्रद्धा और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। मेले के दौरान देवी-देवताओं की पारंपरिक ढाई परिक्रमा की रस्म पूरे विधि-विधान और भक्ति भाव के साथ सम्पन्न की गई।
इस विशेष रस्म में विभिन्न गांवों से आए देवी-देवताओं के प्रतीक स्वरूप रथों और ध्वजों को मंदिर परिसर के चारों ओर ढाई बार घुमाया गया। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह परिक्रमा समृद्धि, सुख-शांति और क्षेत्र की रक्षा का प्रतीक मानी जाती है।
मेला स्थल पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिन्होंने भक्ति गीतों, नृत्य और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ इस आयोजन को और भी भव्य बना दिया। सुरक्षा के साथ मेले की हुई सम्पन्न जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
माता मावली मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह स्थानीय आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी मेले ने लोगों को एकता और आस्था के सूत्र में बांधने का
