कानपुर: अगर आप कोई नया व्यापार शुरू करने की सोच रहे हैं और कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो सुगंधित पौधों का बिजनेस आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. इस कारोबार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे छोटी जगह में भी शुरू किया जा सकता है और इसकी मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है. इत्र, अगरबत्ती, कॉस्मेटिक, दवा और पूजा सामग्री जैसी चीजों में सुगंधित पौधों का खूब इस्तेमाल होता है, इसलिए इनका बाजार कभी मंदा नहीं पड़ता.
क्यों फायदेमंद है सुगंधित पौधों का व्यापार
सुगंधित पौधों की खेती में ज्यादा लागत नहीं आती. बीज या पौधे, थोड़ी सी जमीन, नियमित देखभाल और सही जानकारी के साथ आप अच्छा उत्पादन ले सकते हैं. इन पौधों से तेल निकाला जाता है, जिसे आगे चलकर इत्र और खुशबूदार उत्पादों में इस्तेमाल किया जाता है. खास बात यह है कि किसान या उद्यमी कच्चा माल बेचकर भी मुनाफा कमा सकते हैं और चाहें तो खुद का छोटा प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर आमदनी कई गुना बढ़ा सकते हैं. कानपुर स्थित एफएफडीसी एक्सटेंशन यूनिट में इसके लिए विशेष प्रशिक्षण भी कराया जाता है. यहां के प्रभारी डॉ. भक्ति विजय शुक्ला बताते हैं कि सुगंधित पौधों की खेती और उनसे उत्पाद बनाने की सही तकनीक सीखकर लोग बेहद कम लागत में उन्नत रोजगार हासिल कर सकते हैं. प्रशिक्षण के दौरान पौधों की पहचान, खेती, कटाई, तेल निकालने और मार्केटिंग तक की जानकारी दी जाती है.
इत्र बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख सुगंधित पौधे
गुलाब- गुलाब की खुशबू दुनिया भर में पसंद की जाती है. इससे निकाला गया गुलाब जल और गुलाब का तेल इत्र, कॉस्मेटिक और धार्मिक कार्यों में खूब इस्तेमाल होता है. गुलाब की खेती से किसान को फूल और तेल दोनों से आमदनी होती है.
चमेली (जैस्मिन)- चमेली की खुशबू काफी तेज और टिकाऊ होती है. इसका तेल महंगे इत्र बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. इसकी खेती छोटे स्तर पर भी की जा सकती है और बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है.
खस (वेटिवर)- खस की जड़ से निकलने वाला तेल इत्र और ठंडक देने वाले उत्पादों में काम आता है. गर्मियों में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है. इसकी खेती कम पानी में भी संभव है, जिससे लागत और भी कम हो जाती है.
लैवेंडर- लैवेंडर का इस्तेमाल इत्र के साथ-साथ दवाओं और अरोमाथेरेपी में होता है. इसकी खेती अब भारत में भी तेजी से बढ़ रही है और इससे अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है.
जेरैनियम- जेरैनियम का तेल खुशबूदार होने के साथ-साथ मच्छर भगाने वाले उत्पादों में भी इस्तेमाल होता है. इसकी खेती आसान है और इसकी बाजार मांग स्थिर बनी रहती है.
प्रशिक्षण से खुलेगा मुनाफे का रास्ता
सुगंधित पौधों का कारोबार तभी ज्यादा फायदेमंद होता है, जब सही जानकारी और तकनीक हो. एफएफडीसी एक्सटेंशन यूनिट कानपुर में मिलने वाला प्रशिक्षण लोगों को आत्मनिर्भर बनने का मौका देता है. यहां से सीख लेकर कई लोग आज सफल उद्यमी बन चुके हैं. अगर आप भी कम लागत में बड़ा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो सुगंधित पौधों का व्यापार आपके लिए सुनहरा अवसर साबित हो सकता है.