मीडिया तो चली जाएगी, तुम यहीं रहोगे… नोएडा इंजीनियर युवराज की मौत मामले में चश्मदीद को पुलिस ने दी थी धमकी?

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Noida Techie Death Case: उत्तर प्रदेश के नोएडा में सेक्टर-150 में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दर्दनाक मौत से हर कोई सन्न है. किस तरह सिस्टम की सुस्ती ने एक 27 साल के युवराज की जान ले ली. उसकी मौत के दो ही चश्मदीद गवाह हैं. एक खुद उसके पिता और दूसरा 26 साल का डिलीवरी एग्जीक्यूटिव मोनिंदर सिंह. उसकी आंखों में गुस्सा और दर्द दोनों है. मोनिंदर वही शख्स हैं जिन्होंने कड़कड़ाती ठंड में युवराज को बचाने के लिए उस खौफनाक गड्ढे में छलांग लगा दी थी. अब उन्होंने बताया कि आखिर वो मीडिया से दूर क्यों थे. इस बीच उनके साथ क्या कुछ हुआ. आइए जानते हैं सब…

गायब हो गया था चश्मदीद!
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मोनिंदर सिंह ने मंगलवार को बताया कि उनपर पुलिस अधिकारियों ने 10 दिन तक मीडिया से दूर रहने का दबाव डाला था. कहा था कि मीडिया तो चली जाएगी, तुम यही रहोगे. दरअसल, घटना के तुरंत बाद मोनिंदर का एक वीडियो काफी वायरल हो गया था, जिसमें उन्होंने युवराज मेहता की मौत को प्रशासन की लापरवाही ठहराया था. कहा था कि प्रशासन की लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार का चिराग बुझा दिया. अगर अधिकारी चाहते तो युवराज को बचाया जा सकता था. इसके बाद चश्मदीद ने मीडिया से दूरी बना ली थी. एक वीडियो में उन्होंने पुलिस की तारीफ की थी. मगर अब एक बार फिर मोनिंदर मीडिया के सामने आए और पुलिस को लेकर बड़ा राज खोला.

अब पुलिस को लेकर खोला चौंकाने वाला राज
मोनिंदर सिंह ने कहा, मुझे पुलिस ने यह कहकर बुलाया कि सीनियर अधिकारी मामले के बारे में मुझसे बात करना चाहते हैं. जब मैं वहां गया, तो तीन-चार अधिकारी मुझे नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन के पास एक पार्क में ले गए और मीडिया से बात करने के लिए मुझे डांटा. मुझसे कहा गया कि पुलिस की तरफ से ही बयान दोगे. कहोगे कि पुलिसकर्मी अपनी पूरी ताकत युवराज मेहता को बचाने में लगा रहे थे. वह पानी के अंदर तक गए थे उसे बचाने के लिए.

उसने आगे कहा, मुझे पुलिस अधिकारियों ने मौखिक रूप से एक स्क्रिप्ट भी दी और एक वीडियो रिकॉर्ड किया. मैं डर गया था इसलिए मैंने उनकी हां में हां कर दी. जैसा उन्होंने करने को कहा मैं वो सब करने के लिए सहमत हो गया. मगर, फिर मैंने फैसला किया कि मैं इस मामले में एकमात्र चश्मदीद गवाह हूं और मैं सच के साथ खड़ा रहूंगा. मेरा परिवार और स्थानीय लोग मेरा समर्थन कर रहे हैं. उन्होंने आगे आरोप लगाया, पुलिसकर्मियों ने कहा कि ये मामला 2-3 दिन में मीडिया से शांत हो जाएगा. जबकि तुम यही रहते हो. जब तक मामला शांत नहीं होता 5-10 दिन के लिए गायब हो जाओ. मीडिया से दूरी बना लो.

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अधिकारियों का ये कहना

जब इस बारे में एक सीनियर पुलिस अधिकारी से पूछा तो उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर सारे आरोपों को नकार दिया. उन्होंने कहा कि पुलिस ने उन्हें धमकी नहीं दी, लेकिन अगर ऐसे आरोप लगते हैं, तो उन पर विचार किया जाएगा और उनकी जांच की जाएगी.

दो घंटे तक मौत से जंग और सिस्टम की बेरुखी
गौरतलब है, हादसा 16 जनवरी की रात का है. गुरुग्राम से लौट रहे सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार घने कोहरे के कारण सड़क किनारे बने एक निर्माणाधीन मॉल के 20-40 फीट गहरे बेसमेंट में जा गिरी. युवराज ने कार की छत पर खड़े होकर अपने पिता को फोन किया, ‘पापा, मैं डूब रहा हूं, मुझे बचा लो.’ पिता मौके पर पहुंचे, पुलिस और दमकल की टीमें भी आईं, लेकिन घंटों तक ‘रेस्क्यू’ के नाम पर सिर्फ तमाशा होता रहा. न गोताखोर समय पर मिले, न ही ठंडे पानी में उतरने का साहस किसी ने दिखाया. अंततः युवराज ने अपनी पिता की आंखों के सामने जलसमाधि ले ली. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, कड़ाके की ठंड और मौत के खौफ से युवराज को कार्डियक अरेस्ट हुआ था. इधर शनिवार को सुबह करीब 1.50 बजे वह एक ऑर्डर डिलीवर करने जा रहे थे, तभी उन्होंने पुलिस को मेहता को बचाने में लगा देखा. तबतक कार पानी में पूरी तरह डूब चुकी थी. उन्होंने तुरंत लाइफ जैकेट पहनकर पानी में छलांग लगा दी, लेकिन 30 मिनट की कोशिश के बाद भी वह मेहता को ढूंढ नहीं पाए.

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