न पद, न वर्दी, फिर भी ट्रैफिक का हीरो…सुल्तानपुर में 13 सालों से जाम हटा रहा अजीम, लोग कहते हैं ‘एसीपी रुद्रा’

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Last Updated:January 21, 2026, 12:16 IST

Sultanpur News: सुल्तानपुर में अजीम अंसारी बिना वर्दी और सरकारी पद के बीते 13 सालों से ट्रैफिक संभाल रहे हैं. चौराहों पर उनकी मौजूदगी से जाम तुरंत खुल जाता है. पुलिस भी उनके अनुभव पर भरोसा करती है. अजीम आज शहर की पहचान और प्रेरणा बन चुके हैं.

अजीम अंसारी 

सुल्तानपुर : आमतौर पर सिपाही का नाम आते ही लोगों के मन में सरकारी वर्दी, बैज और अनुशासन भरी ड्यूटी की तस्वीर उभरती है, लेकिन यूपी के सुल्तानपुर जिले में एक ऐसा शख्स भी है, जो बिना किसी सरकारी पहचान के बीते करीब 13 सालों से यातायात व्यवस्था को संभाल रहा है. समाज की नजर में भले ही उसे सामान्य से अलग माना जाता हो, लेकिन सड़कों पर उसकी सक्रियता और जिम्मेदारी किसी प्रशिक्षित कांस्टेबल से कम नहीं है. जिसकी चर्चा सुल्तानपुर ही नहीं हर जगह होती है.

सुल्तानपुर शहर के व्यस्त चौराहों जैसे पांचोंपीरन, पयागीपुर, अमहट आदि पर यह युवक पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ट्रैफिक जाम खुलवाने का काम करता है. अजीम की मौजूदगी का असर इतना होता है कि गलत दिशा से चलने वाले वाहन चालक भी तुरंत सही रास्ते पर आ जाते हैं. स्थानीय लोग उसकी कार्यशैली की खुलकर सराहना करते हैं.

डंडा हाथ में, हौसला बुलंद
हाथ में डंडा और कमर में पिस्टल लगाए अजीम खुद को “एसीपी रुद्रा” बताते हैं. उनका वास्तविक नाम अजीम अंसारी है. नगर कोतवाली क्षेत्र के कई प्रमुख चौराहों पर वह ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए जाने जाते हैं. जाम लगने की सूचना मिलते ही वह बिना देर किए मौके पर पहुंच जाते हैं और पूरे आत्मविश्वास के साथ यातायात सुचारू कर देते हैं

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पढ़ाई कम, अनुभव बड़ा
लोकल 18 की टीम ने जब अजीम से उसकी पढ़ाई के बारे में पूछा तो उन्होंने खुद को कक्षा एक तक पढ़ा हुआ बताता है, लेकिन सड़क पर उनका अनुभव वर्षों का है. बीते एक दशक से अधिक समय से वह नगर कोतवाली पुलिस के सहयोग से यह काम कर रहे हैं. कई बार ट्रैफिक की स्थिति बिगड़ते ही पुलिसकर्मी स्वयं उसे बुला लेते हैं, क्योंकि उन्हें उसके अनुभव और मेहनत पर पूरा भरोसा है.

मेहनत का सम्मान भी मिलता है
अजीम अंसारी का कहना है कि इस सेवा के बदले पुलिसकर्मी आपसी सहयोग से उसे हर महीने लगभग 5 हजार रुपये जीवन यापन के लिए देते हैं. यह राशि किसी सरकारी योजना के तहत नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों की अपनी सैलरी से दी जाती है. बिना किसी पद, पहचान और वर्दी के अजीम अंसारी आज सुल्तानपुर की ट्रैफिक व्यवस्था का एक जाना-पहचाना और सम्मानित चेहरा बन चुका है, जो समाज के लिए प्रेरणा भी है.

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Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें

Location :

Sultanpur,Uttar Pradesh

First Published :

January 21, 2026, 12:16 IST

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सुल्तानपुर में 13 सालों से जाम हटा रहा अजीम, लोग कहते हैं ‘एसीपी रुद्रा’

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